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जब मन अशांत हो और मोह सताए, तब प्रेमानंद जी के ये 50 अनमोल वचन ज़रूर पढ़ें

जब मन अशांत हो और मोह सताए, तब प्रेमानंद जी के ये +50 अनमोल वचन ज़रूर पढ़ें

Premanand Ji Quotes

हम सब भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सुकून ढूंढ रहे हैं, लेकिन क्या असली सुकून बाहरी चीज़ों में है? वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि शांति कहीं बाहर नहीं, बल्कि आपके 'नाम जप' और 'कर्मों के समर्पण' में छिपी है।

आज के इस विशेष लेख में हम महाराज जी के उन 50 अनमोल विचारों को साझा कर रहे हैं, जो न केवल आपके सोचने का नज़रिया बदल देंगे, बल्कि आपको जीवन जीने की एक नई राह दिखाएंगे।

श्री हित प्रेमानंद जी के 50 अनमोल विचार

  1. अज्ञान के कारण ही मनुष्य संसार में मोह से ग्रसित होकर दुखी हो रहा है।
  2. जब तक हृदय में सत्य का ज्ञान नहीं होगा, तब तक सांसारिक रोना बंद नहीं होगा।
  3. हम जिसे अपना मानकर रो रहे हैं, उसका वास्तव में किसी से कोई संबंध नहीं है।
  4. मृत्यु केवल शरीर का अंत है, आत्मा तो अपने कर्म लेकर नए सफर पर निकल जाती है।
  5. पांच तत्वों का यह शरीर वापस पांच तत्वों में ही मिल जाता है, फिर शोक कैसा?
  6. मृत्यु लोक में हर किसी को जाना है, चाहे वह महात्मा हो या कोई साधारण मनुष्य।
  7. जिसकी जितनी आयु निश्चित है, वह उतना ही इस संसार में रुकेगा।
  8. जाने वाले के लिए पछताने से बेहतर है कि हम खुद जाने की तैयारी शुरू कर दें।
  9. भगवान के आश्रित रहने से और नाम जप करने से ही मृत्यु का भय और मोह नष्ट होता है।
  10. मोह नष्ट होते ही दुख की जगह हृदय में दिव्य आनंद की अनुभूति होने लगती है।
Premanand Ji Maharaj
  1. अज्ञान की दशा में ही हमें लगता है कि 'मेरा' प्रियजन मुझे छोड़कर चला गया।
  2. कोई मरता नहीं है, यह केवल मोह है जो हमें सत्य देखने से रोकता है।
  3. न जाने कितने जन्मों में हमने किसे माँ और पिता बनाया, यह सब माया का खेल है।
  4. जाने वाली आत्मा की शांति के लिए रोने के बजाय स्वयं भगवान का भजन करें।
  5. मोह ही संसार का सबसे बड़ा दुख है, इससे बचने का एकमात्र रास्ता ईश्वर का नाम है।
  6. भजन करने से ही हृदय में श्रेष्ठ आध्यात्मिक स्थिति और शांति आने लगती है।
  7. जब भजन बढ़ता है, तो संसार के भोगों के प्रति इच्छा स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
  8. एक-एक नाम जप आपके भीतर से संसार के प्रति वैराग्य पैदा करता है।
  9. नाम जप से ही अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान और भगवान से प्रेम संभव है।
  10. जैसे भूखे को थोड़ा भोजन तृप्त नहीं करता, वैसे ही कम नाम जप से मन शांत नहीं होता।
Qoutes In Hindi
  1. हम अनंत जन्मों की वासनाओं से घिरे हैं, इसे काटने के लिए भारी भजन की आवश्यकता है।
  2. नाम जप की शुरुआत कम से कम 24 घंटे में से 12 घंटे करने का संकल्प लें।
  3. जब आप पर्याप्त भजन करेंगे, तभी समझ आएगा कि आपकी आध्यात्मिक भूख मिट रही है।
  4. भजन बढ़ाओ और देखो कि कैसे आपके भीतर ज्ञान की नई भूमिकाएं बदलती हैं।
  5. भक्ति की ऊंचाई तभी मिलती है जब नाम जप आपकी श्वासों में बसने लगे।
  6. अपने बीते हुए समय का अफसोस करने के बजाय, उसे भगवान को समर्पित कर दें।
  7. हे नाथ! मैं संसार के राग में आपको भूल गया था, अब मेरा सब कुछ आपको अर्पण है।
  8. कर्मों का भगवान को अर्पण करना ही सबसे बड़ा और सरल 'भागवत धर्म' है।
  9. कृष्णार्पणमस्तु कहने से ही जीवन का परम लाभ प्राप्त होता है।
  10. जो भी कार्य आप कर रहे हैं, उसे भगवान की सेवा मानकर ही करें।
  11. कर्म समर्पण का फल इतना दिव्य है कि यह आपको जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है।
  12. धर्म का पालन सरल है: बस पाप कर्मों से बचें और पुण्य को प्रभु को दें।
  13. यदि अनजाने में कोई पाप हो जाए, तो उसका तुरंत प्रायश्चित करना आवश्यक है।
  14. प्रायश्चित के बिना पाप का बोझ अगले जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ता।
  15. गंगा स्नान, दान-पुण्य और प्रभु का पाठ पापों के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।
Motivational Quotes
  1. अपने हिसाब को इसी जन्म में साफ कर लें ताकि आगे का रास्ता सुगम हो।
  2. पाप कर्मों का त्याग और कर्मों का समर्पण ही मोक्ष का द्वार है।
  3. घर बैठे कल्याण चाहते हैं, तो बस प्रभु का नाम जपें और समर्पित रहें।
  4. हमारी हर श्वास और हर कर्म केवल प्रभु की प्रसन्नता के लिए होना चाहिए।
  5. राधा नाम का आश्रय लेने से कठिन से कठिन प्रारब्ध भी कट जाता है।
  6. संसार एक मुसाफिरखाना है, यहाँ किसी से भी मोह करना व्यर्थ है।
  7. शांति बाहर की वस्तुओं में नहीं, बल्कि अंतरात्मा के ज्ञान में छिपी है।
  8. जब आप भगवान के हो जाते हैं, तो पूरी सृष्टि आपकी सहायक बन जाती है।
  9. दुख केवल एक संकेत है कि आप भगवान से दूर होकर संसार में सुख खोज रहे हैं।
  10. भक्ति कोई दिखावा नहीं, बल्कि अपने अहंकार को भगवान के चरणों में गला देना है।
  11. जो बीत गया उसे प्रभु को सौंप दें और जो बाकी है उसे प्रभु के नाम कर दें।
  12. सच्ची विद्वत्ता वही है जो आपको मृत्यु के समय निर्भय बना दे।
  13. संसार की सेवा करें, पर हृदय में केवल श्री राधा-कृष्ण को ही बसाएं।
  14. जीवन का लक्ष्य केवल भोग नहीं, बल्कि परम आनंद की प्राप्ति है।
  15. राधा-राधा जपते रहें, यही मंत्र आपके जीवन की नैय्या पार लगाएगा।

महाराज जी के इन वचनों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए संकलित किया गया है। अंत में बस इतना ही समझना ज़रूरी है कि यह संसार एक रंगमंच है और हम सब यहाँ अपना-अपना किरदार निभाने आए हैं।

असली जीत उस व्यक्ति की है जो इस मोह-माया के जाल में फंसने के बजाय अपनी डोर उस परमात्मा के हाथ में सौंप देता है। आज से ही कोशिश करें कि कम से कम 15-20 मिनट एकांत में बैठकर प्रभु का नाम जपें।

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।। राधे-राधे ।।

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