हस्तमैथुन (Masturbation) की लत से कैसे पाएं छुटकारा? जानें श्री प्रेमानंद जी से
हमारे समाज में आज भी हस्तमैथुन और ब्रह्मचर्य जैसे विषयों पर खुलकर बात करने से लोग कतराते हैं। माता-पिता समझा नहीं पाते और डॉक्टरों से अक्सर युवाओं को गलत सलाह मिल जाती है, जिससे वे इसे 'नॉर्मल' मान लेते हैं। इसी चुप्पी को तोड़ते हुए, पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज ने युवाओं को वह कड़वा सच बताया है जो कोई और नहीं बताता।
इंटरनेट ने युवा पीढ़ी को कुछ ऐसी गंभीर और बुरी आदतों का शिकार बना दिया है जो उन्हें अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं। चिकित्सा जगत से भी कई बार इसे सामान्य बताया जाता है, लेकिन महाराज जी ने स्पष्ट किया है कि कैसे यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पतन का कारण है।
श्री प्रेमानंद जी महाराज के मुख्य विचार
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◆ वीर्य की महत्ता और इसका निर्माण:
महाराज जी समझाते हैं कि वीर्य का निर्माण बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। जब लगभग 40 किलो अन्न ठीक से पचता है, तब जाकर एक बार संतान उत्पत्ति के योग्य वीर्य बनता है। इसे नष्ट करना अपने शरीर के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है। -
◆ भयंकर शारीरिक नुकसान:
महाराज जी चेतावनी देते हैं कि यह आदत शरीर की हड्डियों तक का रस निचोड़ लेती है। आँखों की रोशनी कम होना, कमर में भयंकर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियां शरीर को जवानी में ही घेर लेती हैं।
लत से छुटकारा पाने के अचूक उपाय
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◆ दृढ़ संकल्प (Willpower):
सबसे पहले मन में पक्का नियम लें कि आप यह गलत काम कभी नहीं करेंगे। जाग्रत अवस्था में खुद पर पूरा नियंत्रण रखें। -
◆ कठोर शारीरिक व्यायाम:
अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। रोज 100 दंड-बैठक लगाएं और 4 से 5 किलोमीटर दौड़ें। जब शरीर मेहनत से थक जाएगा, तो गंदे विचार अपने आप खत्म हो जाएंगे। -
◆ नाम जप और शुद्ध आहार:
खान-पान शुद्ध रखें और निरंतर भगवान के नाम का जप करें। इनपुट शुद्ध होगा, तभी आउटपुट (विचार) शुद्ध होगा।
पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज का यह मार्गदर्शन केवल प्रवचन नहीं, बल्कि एक 'लाइफलाइन' है। आज ही संकल्प लें कि आप अपनी इस दिव्य ऊर्जा को गंदी आदतों में नहीं, बल्कि दंड-बैठक, पसीने और नाम-जप में लगाकर खुद को फौलाद बनाएंगे।
क्या आप आज से महाराज जी के बताए 'दंड-बैठक' और 'नाम-जप' के नियम को अपनाने के लिए तैयार हैं? हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं।
।। राधे-राधे ।।
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