बुरे विचार क्यों आते हैं और इनसे कैसे बचें? —जानें महाराज जी से
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क्या आप भी भीड़ में होकर भी खुद को अकेला पाते हैं? या शायद आपके मन के सवाल आपको चैन से सोने नहीं देते? हर व्यक्ति, चाहे वह आध्यात्मिक हो या सांसारिक, कभी न कभी अपने मन के विचारों से परेशान जरूर होता है।
"मैं नहीं चाहता, फिर भी गंदे विचार क्यों आते हैं?" यह प्रश्न हर साधक के मन में उठता है। इस वीडियो में श्रद्धेय प्रेमानंद जी महाराज ने इसका एक बहुत ही 'कड़वा लेकिन सच्चा' उत्तर दिया है। यदि आप भी ओवरथिंकिंग (Overthinking) और मन की गंदगी से जूझ रहे हैं, तो महाराज जी का यह मार्गदर्शन आपके लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा।
प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन
महाराज जी ने मन की कार्यप्रणाली और उसे शुद्ध करने के निम्नलिखित उपाय बताए हैं:
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◆ विचारों का स्रोत (Source of Thoughts):
महाराज जी समझाते हैं कि मन में जो विचार आ रहे हैं, वे हमारे पूर्व जन्मों और इस जन्म के कर्मों (संस्कारों) का परिणाम हैं। जैसे कंप्यूटर में जो डेटा फीड किया गया है, स्क्रीन पर वही दिखेगा। अगर आपने अतीत में गलत दृश्य देखे हैं या गलत संग किया है, तो मन वही रील (Reel) बार-बार घुमाएगा। इससे घबराना नहीं चाहिए। -
◆ कड़वा सच - हम रस लेते हैं (The Bitter Truth):
महाराज जी एक बहुत बड़ी बात कहते हैं - "विचार तुम्हें परेशान नहीं कर रहे, तुम विचारों में रस (Enjoyment) ले रहे हो।" जब गंदे विचार आते हैं, तो ऊपर से हम कहते हैं कि यह गलत है, लेकिन अंदर ही अंदर हम उस विचार के साथ बह जाते हैं। जिस दिन आप उन विचारों से सच में नफरत करने लगेंगे, वे आने बंद हो जाएंगे।
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◆ उपेक्षा ही एकमात्र उपाय (Ignore Them):
गंदे विचारों से लड़ने की जरूरत नहीं है, उनकी 'उपेक्षा' (Ignore) करो। महाराज जी उदाहरण देते हैं कि जैसे हाथी बाजार से गुजरता है और कुत्ते भौंकते हैं, लेकिन हाथी मुड़कर जवाब नहीं देता। वैसे ही, आप अपना 'नाम जप' (Chanting) करते रहें और विचारों को भौंकने दें। अगर आप उनसे लड़ेंगे या उनमें उलझेंगे, तो वे और ताकतवर हो जाएंगे। -
◆ नाम जप का पॉवर (Power of Chanting):
मन की गंदगी को केवल भगवान का नाम ही धो सकता है। जब भी कोई बुरा विचार आए, तो जोर-जोर से (या मन में) 'राधा-राधा' या अपने इष्ट का नाम जपना शुरू कर दें। निरंतर नाम जप करने से पुराने संस्कार जल जाते हैं और नए पवित्र विचार आने लगते हैं।
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◆ दृष्टि और संग का सुधार (Diet for the Mind):
महाराज जी चेतावनी देते हैं कि अगर आप गंदी फिल्में देखेंगे, गलत बातें सुनेंगे या गलत लोगों का संग (Bad Company) करेंगे, तो मन कभी साफ नहीं होगा। इनपुट (Input) शुद्ध होगा, तभी आउटपुट (Output) शुद्ध होगा। अपनी आँखों और कानों को भगवान की सेवा और सत्संग में लगाओ।
दोस्तों, अंत में यही समझना सबसे आवश्यक है कि मन का स्वभाव है भटकना, और हमारा कर्तव्य है उसे बार-बार प्रभु के चरणों में वापस लाना। गंदे विचार या बुरे ख्यालों से डरकर खुद को पापी न समझें, यह केवल पुराने संस्कारों की धूल है जो उड़ रही है।
महाराज जी कहते हैं कि 'अंधेरे को लाठी मारकर नहीं भगाया जा सकता, बस एक छोटा सा दीपक जलाना ही काफी है।' ठीक उसी तरह, मन की गंदगी को हटाने के लिए विचारों से कुश्ती मत लड़िए, बस 'नाम जप' (राधा-राधा) रूपी दीपक जला लीजिए। अंधेरा अपने आप गायब हो जाएगा।
तो आज से ही यह संकल्प लें—जब भी मन शोर मचाए, आप शांत रहकर अपनी जुबान से और हृदय से प्रभु को पुकारें। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं; प्रभु की कृपा हर पल आपके साथ है। बस चलते रहें, मंजिल (प्रभु का प्रेम) बाहें फैलाए आपका इंतजार कर रही है।
आपकी राय मायने रखती है:
"क्या आपके मन में भी कभी ऐसे सवाल उठते हैं? कमेंट में 'राधा-राधा' जरूर लिखें और इस पोस्ट को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
जुड़ें रहें 'Athahprem' के साथ, अपने भीतर की शांति को खोजने के लिए।"
।। राधे-राधे ।।
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